

हरिद्वार। सप्तसरोवर क्षेत्र में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। श्री रणकेश्वर धाम एवं मां गंगा के पावन तट पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुदेव का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना, भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

श्री रणकेश्वर धाम के श्री श्री 1008 अष्टकौशल श्रीमहंत हरेराम गिरी महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का सबसे पावन एवं प्रेरणादायी पर्व है। गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देते हैं और मनुष्य को सत्य, धर्म एवं आत्मबोध के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के सानिध्य में की गई साधना और गुरु पूजा से साधक के शरीर एवं चेतना में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
श्री पंचदशनाम जूना सन्यासिनी अखाड़ा की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत आराधना गिरी ने कहा कि सद्गुरु का सानिध्य जीवन की सबसे बड़ी प्राप्ति है। गुरु अपने ज्ञान, तप और अनुभव से शिष्य के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं तथा उसे जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर गुरु स्मरण, ध्यान और पूजन करने से आध्यात्मिक उन्नति तीव्र होती है तथा जीवन में अनुशासन, संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना विकसित होती है।
महंत गोविंद गिरी (मोरवी, जूना अखाड़ा) ने भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गंगा तट पर गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने गुरु चरणों में जलधारा, पुष्प, धूप एवं दीप अर्पित करते हुए धर्म, नियम और गुरु भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं का संरक्षण और गुरु के बताए मार्ग पर समभाव से सेवा करना ही सच्ची गुरु भक्ति है। गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों रूपों से समृद्ध बनाता है।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना के साथ आरती कर विश्व कल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और मानवता के मंगल की कामना की। इस अवसर पर उषा माता, पंडित दयालु जी, प्रवीण, आकाश भाटी, सूरज शर्मा, विदित शर्मा, जतिन भाई, मंजीत शर्मा सहित विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर समर्पित करने का संकल्प लिया।



