महा कुम्भ 2021

श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बनेंगे कैलाशानंद ब्रह्मचारी


: जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम में की गई घोषणा, हुआ संस्कार मुंडन


: 14 जनवरी को होगा पट्टा अभिषेक, आज अखाड़े में विधि-विधान से की जाएगी घोषणा


हरिद्वार। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बनेंगे। इसकी घोषणा जगद्गुरु आश्रम में पंचायती अखाड़े के पंचों के बीच की गई। 14 जनवरी को मकर सक्रांति पर अखाड़े की ओर से उनका पट्टाभिषेक किया जाएगा। जबकि शुक्रवार को निरंजनी अखाड़े में सन्यासी परंपरा के तहत विधि-विधान से घोषणा की जाएगी। 
कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में जगदगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज से स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने दीक्षा ली। उनके सानिध्य में उनका मुंडन संस्कार किया गया। उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज की समाधि स्थल पर जाकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद अब पूरी रात अखाड़ों की परंपरा के अनुसार सन्यास दीक्षा का पहला चरण विजया होम संस्कार होगा। जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अखाड़े का अधिकार होता है कि वो किसे आचार्य महामंडलेश्वर बनाएं। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा का कैलाशानंद ब्रह्मचारी को आचार्य महामंडलेश्वर बनाया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने दीक्षा ली है। कैलाशानंद ब्रह्मचारी संन्यासी बनते हुए अब से कैलाशानंद गिरि होंगे। अब से कैलाशानंद गिरि महाराज के नाम से ही इन्हें जानेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे इसकी बहुत प्रशसन्नता है कि मेरा शिष्य आचार्य महामंडलेश्वर बने हैं। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़े की पूरी परंपराओं के साथ आचार्य महामंडलेश्वर की दीक्षा होगी। गंगा में पिंडदान के साथ ही अन्य परंपराओं का निवर्हन किया जाएगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि आचार्य महामंडलेश्वर को नियमों के अनुसार मूल गुरू चोटी काटते हैं। इसके बाद लंगोटी पहनाई जाती है। गंगा किनारे पिंडदान कर सुबह तड़के चोटी काटने की परंपरा होती है। मौके पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं दी और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर श्रीमहंत राम रतन गिरि महाराज, महंत राधेश्याम गिरि महाराज, महंत मनीष भारती महाराज, महंत नरेश गिरि महाराज, महंत सुखदेव पुरी महाराज, महंत नीलकंठ गिरि महाराज, महंत गंगा गिरि महाराज, रत्नगिरी महाराज, महंत अनुज पुरी महाराज, महंत राजेंद्र भारती महाराज आदि उपस्थित थे।

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