
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण द्वारा उदासीनाचार्य जगद्गुरु भगवान श्रीचंद्र जी की 532वीं जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में शुक्रवार को चंद्राचार्य चौक से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में 13 अखाड़ों के संत-महंतों ने शामिल होकर भगवान श्रीचंद्र जी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। बैंड-बाजों और धार्मिक धुनों के बीच निकली शोभायात्रा में देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।

शोभायात्रा से पूर्व संत-महात्माओं ने भगवान श्रीचंद्र जी का विधिवत पूजन किया। इसके बाद संतों ने झंडी दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर संतों और झांकियों का स्वागत किया। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु भगवान श्रीचंद्र जी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र जी ने त्याग, तपस्या, सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर मानव सेवा और धर्म के प्रति समर्पण का भाव मजबूत करना चाहिए।
मुखिया महंत भगत राम ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र जी की जयंती उदासीन परंपरा के लिए विशेष आध्यात्मिक अवसर है। उनकी तपस्या और विचारों ने समाज को धर्म एवं सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने कहा कि संत परंपरा ने सदैव समाज को जोड़ने और मानवता की सेवा का संदेश दिया है। भगवान श्रीचंद्र जी का जीवन इसी आध्यात्मिक परंपरा का प्रेरणास्रोत है।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि भगवान श्रीचंद्र जी का जीवन त्याग और साधना का प्रतीक है। उनकी जयंती पर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
इस दौरान ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, बाबा हठयोगी, कोठारी महंत नितिन दास महाराज समेत बड़ी संख्या में संत-महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे। 20 सितंबर को सुबह 11 बजे भगवान श्रीचंद्र जी का भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा।



