
लक्ष्य हरिद्वार ब्यूरो
हरिद्वार। अर्धकुंभ के लिए गंगनहर के किनारे घाट तो आकार लेने लगे, लेकिन घाटों की सुरक्षा के लिए नहर में डाली गई मिट्टी अब विभागीय लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। क्लोजर अवधि खत्म हो चुकी है, घाट निर्माण का काम आगे बढ़ चुका है, लेकिन नहर की तली में बनाई गई मिट्टी की सुरक्षा दीवार अब भी जस की तस खड़ी है। पानी के बहाव के साथ यह मिट्टी लगातार घुलकर नहर में बह रही है। करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में घाट निर्माण चलने के कारण बड़ी मात्रा में मिट्टी के जलधारा में मिलने से गंगनहर की निर्मलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घाट निर्माण के दौरान जलधारा से निर्माणाधीन घाटों को बचाने के लिए मिट्टी की अस्थायी सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। निर्माण कार्य पूरा होने और क्लोजर अवधि समाप्त होने के बाद इस मिट्टी को हटाया जाना था, लेकिन उत्तराखंड सिंचाई विभाग के पुनर्वास खंड के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इसे हटाने की जहमत नहीं उठाई।
पानी के साथ बह रही मिट्टी
स्थानीय लोगों के अनुसार नहर में पानी छोड़े जाने के बाद मिट्टी धीरे-धीरे कटकर पानी के साथ बह रही है। इससे बड़ी मात्रा में मिट्टी जलधारा में मिल रही है। लोगों का कहना है कि एक ओर गंगा और उसकी सहायक जलधाराओं को निर्मल रखने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य के बाद छोड़ी गई मिट्टी सीधे पानी में मिल रही है।
यूपी के अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल
गंगनहर के संचालन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों की है। इसके बावजूद नहर में मिट्टी बहने के मामले में उनकी ओर से भी कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के विभाग ने मिट्टी नहीं हटाई और उत्तर प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी भी आंखें मूंदे बैठे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गंगनहर की जलधारा की निगरानी और उसकी निर्मलता की जिम्मेदारी किसकी है।
रविवार दोपहर करीब 2:30 बजे एक गंगा भक्त की ओर से मौके के वीडियो और फोटो साझा किए गए। तस्वीरों में नहर की तली में पड़ी मिट्टी और पानी के बहाव के साथ उसके कटने की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों से तत्काल मिट्टी हटाने और जलधारा को प्रभावित होने से बचाने की मांग की है।
आस्था से जुड़ा सवाल
गंगा और उसकी जलधाराएं करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। अर्धकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले यदि निर्माण कार्यों के कारण जलधारा में मिट्टी बहती रहे तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इनके बाद जलधारा की सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से निभाई जानी चाहिए।



