

समाज का आधार है गृहस्थ आश्रम : करौली शंकर दास जी महाराज
श्री करौली शंकर महादेव धाम में हुआ ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम
नया उदासीन अखाड़े के वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में किया गया ‘Prime Times’ पत्रिका का विमोचन, हजारों भक्त बने शिष्य
श्री करौली शंकर महादेव धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण, महामंडलेश्वर करौली शंकर दास महाराज ने की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा
हरिद्वार, 01 अगस्त। श्री करौली शंकर महादेव धाम में आस्था, ध्यान और समर्पण का एक ऐसा महासागर उमड़ा, जिसने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। विशाल पंडाल में पीले वस्त्र धारण किए हुए लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के समापन के पावन अवसर पर एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस भव्य आयोजन में जहां एक ओर श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन-निर्वाण के मुखिया महंत श्री भगत राम जी (मुखिया श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, महंत श्री जगतार मुनि जी (सचिव-श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन) ने शिरकत की, वहीं दूसरी ओर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी के मंगलकारी उद्बोधन ने समाज को नई दिशा दी। साथ ही देश-विदेश से आए हजारों भक्तों ने दीक्षा प्राप्त कर शिष्य के रूप में एक नए जीवन की शुरुआत की।
कार्यक्रम की भव्यता उस समय और बढ़ गई जब मंच पर महामंडलेश्वर श्री करौली शंकर महादेव जी के साथ श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के वरिष्ठ संत पधारे। इस आयोजन में मुख्य रूप से अखाड़े के मुखिया महंत श्री भगत राम जी और सचिव महंत श्री जगतार मुनि जी उपस्थित रहे। मंच पर संतों के आगमन पर लाखों भक्तों ने गगनभेदी जयकारों के साथ उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। इसी ऐतिहासिक और पावन मंच से श्री करौली शंकर महादेव जी एवं उपस्थित संतों के कर-कमलों द्वारा दरबार की नई मासिक पत्रिका ‘Prime Times’ का भव्य विमोचन किया गया, जिसके माध्यम से दरबार की सूचनाएं और जन-कल्याणकारी विचार जन-जन तक पहुंचेंगे। करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि यह पत्रिका संस्कार व संस्कृति की संवाहक बनेगी। लोक कल्याण व आध्यात्म से प्रेरित इस पत्रिका से जन-जन तक सनातन संस्कृति का संदेश पहुंचाने का कार्य किया जायेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूज्य करौली शंकर महादेव जी ने मीडिया और समाज को स्पष्ट संदेश दिया कि हमारा देश ऋषियों और संतों का देश है जहां आस्था व परम्पराओं को अधिमान दिया जाता है। उन्होंने गृहस्थ जीवन के महत्व को सर्वाेपरि बताते हुए कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा आश्रम है। महाराज जी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम हमारे जन्म और समाज का मूल आधार है। उन्होंने आदि शंकराचार्य जी का उदाहरण देते हुए बताया कि सन्यास के बाद भी उन्हें समाज और गृहस्थ का अनुभव लेने के लिए पुनः शरीर धारण करना पड़ा था।
करौली शंकर महादेव जी ने समाज में फैले भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि तंत्र का अर्थ कोई जादू-टोना या झाड़-फूंक नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्था है (जैसे लोकतंत्र या राजतंत्र)। इस व्यवस्था को समझकर जीने से ही निरंतर सुख और आनंद की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि हमारी अगली पीढ़ी हमारे ही आचरण का अनुसरण करती है। यदि माता-पिता का आचरण शुद्ध है, तो आने वाली पीढ़ी का जीवन स्वतः ही सरल और सुखमय हो जाएगा।
महंत सचिव श्री जगतार मुनि जी ने सनातन धर्म को भारत की रीढ़ की हड्डी बताया और युवाओं में संस्कारों के पतन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक राजकुमारी और ठग गुरु की कथा के माध्यम से समझाया कि गुरु के प्रति दृढ़ निष्ठा और अटूट विश्वास हो, तो स्वयं भगवान नारायण को भी भक्त का उद्धार करने आना पड़ता है।
मुखिया महंत श्री भगत राम जी ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जहाँ संत महापुरुष निवास करते हैं, वहाँ 68 तीर्थों के स्नान का फल प्राप्त होता है और वह स्थान स्वयं वैकुंठ के समान हो जाता है। उन्होंने भक्त नामदेव और धन्ना भगत का उदाहरण देते हुए बताया कि गुरु के बिना जीवन में घोर अंधकार है, और गुरु ही पापों से मुक्त कर प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
इस आयोजन का सबसे दिव्य और प्रतीक्षित क्षण ध्यान साधना और दीक्षा समारोह था। पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर महादेव जी के पावन सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने गहरे ध्यान और साधना का अद्भुत आनंद लिया। इस दुर्लभ अवसर पर भक्तों ने श्री करौली शंकर महादेव जी के माध्यम से परम पूजनीय पूर्ण गुरु बाबा श्री राधा रमण जी मिश्र से विधिवत दीक्षा प्राप्त की। दीक्षा ग्रहण करते ही हजारों भक्त शिष्य बन गए और आधिकारिक रूप से श्री राधा रमण शिष्य संप्रदाय का हिस्सा बन गए।
श्री राधा रमण शिष्य संप्रदाय और करौली शंकर महादेव धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आध्यात्म को वैराग्य (संसार छोड़ने) तक सीमित नहीं रखता। यहाँ दी जाने वाली तंत्र क्रिया योग साधना विशेष रूप से इस तरह से है कि इसे विवाहित और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग भी आसानी से अपना सकते हैं। सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र श्री करौली शंकर महादेव धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ। धाम परिसर में आद्य जगद्गुरु भगवान शंकराचार्य जी की प्रतिमा का अनावरण एवं शास्त्रीय विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठान श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु श्री करौली शंकर दास जी महाराज के कर-कमलों द्वारा किया गया। इस अलौकिक क्षण का साक्षी बनने और गुरु दीक्षा व ध्यान-साधना शिविर में भाग लेने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस अनुष्ठान के बाद साधकों को संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान शंकराचार्य जी सनातन धर्म के पुनरुद्धारक और अद्वैत वेदांत के मुख्य ध्वजवाहक हैं। उनकी प्रतिमा स्थापना का मुख्य उद्देश्य साधकों में ज्ञान, विवेक और आत्म-साक्षात्कार की भावना को पुनर्जाग्रत करना है।
उनका मानना है कि मनुष्य के अधिकांश मानसिक, शारीरिक और पारिवारिक कष्टों का कारण उसके भीतर जमा नकारात्मक स्मृतियां हैं, जिन्हें वैदिक हवन और साधना द्वारा दूर किया जा सकता है।
अद्वैत व स्व-जागरणरू ईश्वर मनुष्य के भीतर ही विद्यमान है। ध्यान और साधना के माध्यम से हर व्यक्ति अपनी सोई हुई चेतना को जगा सकता है।
सनातन का व्यावहारिक रूपरू वे सनातन को केवल कर्मकांड न मानकर जीवन जीने की शैली और आरोग्य विज्ञान मानते हैं।
गुरू पूर्णिमा पर्व पर आयोजित यह आयोजन केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक रहा। समारोह का समापन विशाल भंडारे और गुरु महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादम ग्रहण किया। इस अवसर पर हरिद्वार व रायवाला स्थित मिश्री मठ आश्रम व कानपुर के मुख्य आश्रम में हजारों भक्तों ने ऑनलाईन व उपस्थित होकर कार्यक्रम के माध्यम से गुरू मंत्र प्राप्त किया।



