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डेंगू बुखार जानलेवा है, संक्रमण का सबसे पहला इलाज “सावधानी व जागरुकता” : एम्स निदेशक

देहरादून ( जतिन शर्मा ) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में सोशल आउटरीच सेल की ओर से डेंगू बुखार से बचाव,लक्षण एवं सावधानियां विषय पर सार्वजनिक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के विशेषज्ञों लोगों को डेंगू के कारण व रोकथाम के प्रति जागरुक किया। उन्होंने डेंगू मच्छर को नहीं पनपने देने के उपाय सुझाए और डेंगू पीड़ित मरीजों को सावधानियां व उपचार संबंधी विस्तृत जानकारियां दी। पब्लिक लैक्चर में नगर क्षेत्र की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया। सेल की ओर से लोगों को जनस्वास्थ्य को लेकर चलाए गए अभियानों की जानकारी दी गई। साथ ही उनसे इस जनजागरुक मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया गया। इस दौरान लोगों को इस दौरान उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों से डेंगू बुखार को लेकर कई तरह के सवाल भी पूछे, जिनका एक्सपर्ट्स द्वारा समाधान बताया गया। सोशल आउटरीच सेल के तत्वावधान में आयोजित सार्वजनिक व्याख्यानमाला का एम्स निदेशक प्रोफेसर डा. मीनू सिंह ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह बताया कि डेंगू बुखार जानलेवा है, लिहाजा इसको लेकर सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि इस संक्रमण का सबसे पहला इलाज ही सावधानी व जागरुकता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए जन सहयोग नितांत आवश्यक है, बिना जनसहभागिता के डेंगू के प्रकोप को कम नहीं किया जा सका। एम्स निदेशक प्रोफेसर डा. मीनू सिंह ने बताया कि यदि हम इसके शुरुआती चरण में ही जागरुक हो जाएं तो ग्रसित मरीज को अस्पताल आने की जरूरत ही नहीं होती। लिहाजा हमें इसके लिए इस संक्रमण से जुड़ी सावधानियों को लेकर आम जन को जागरुक करना होगा।

उन्होंने आगाह किया कि यदि समय रहते डेंगू के संक्रमण को फैलने से नहीं रोका गया तो इसके भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं। संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने बताया कि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए डॉक्टर, नर्स की जरूरत पड़ती है लेकिन उसे जड़ से खत्म करने के लिए जनता के सहयोग की जरूरत पड़ती है अगर समय रहते किसी भी बीमारी की रोकथाम के उपाय नहीं जाते तो वह भयंकर रूप ले सकती है। संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने बताया कि डेंगू को जड़ से समाप्त करने की पहली सीढ़ी अपने आसपास की साफ सफाई रखना एवं जनजागरूकता ही है। बताया कि स्वच्छता व जागरुक रहकर हम डेंगू को फैलने से पहले ही रोक सकते हैं। सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सैना ने बताया कि यह एक सामाजिक बीमारी है जिसे समाज के सहयोग से ही फैलने से रोका जा सकता है। उन्होंने जनसामान्य से डेंगू को लेकर सचेत रहने और दूसरे लोगों को भी जागरुक करने की अपील की। सोशल आउटरीच सेल के नोडल ऑफिसर डॉक्टर संतोष कुमार ने बताया कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य डेंगू बुखार (हड्डी तोड़ बुखार) की रोकथाम को लेकर समाज में जनजागृति लाना है। उन्होंने बताया कि लोगों को अपने घरों व आसपास के समाज में डेंगू मच्छर के पनपने के कारकों को समाप्त करने को लेकर एम्स की इस मुहिम का हिस्सा बनना होगा। स्वच्छता के प्रति गंभीर रहकर ही हम डेंगू को जड़मूल मिटा सकते हैं। डा. संतोष कुमार ने आह्वान किया कि जिन लोगों को डेंगू की रोकथाम के उपाय व सावधानियों की भली प्रकार से जानकारी है, उन्हें अन्य लोगों को भी इसको लेकर जागरुक करना होगा, तभी हम अपने समाज से इस बीमारी को समाप्त कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने डेंगू की रोकथाम के लिए विभिन्न चरणों में किए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी भी दी।
जनरल मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डा. प्रसन्न कुमार पंडा ने बताया कि डेंगू का डेथ रेट महज एक फीसदी है, लिहाजा ग्रसित मरीजों को इस बुखार पर काबू पाने के लिए आवश्यक सावधानियों का खयाल रखना चाहिए और बीमारी के क्रिटिकल फेज ( बुखार के कंट्रोल नहीं होने के साथ ही लगातार उल्टी आने, शरीर के किसी भी भाग से रक्तस्राव होने, शरीर में सूजन आने आदि) स्थितियों में तत्काल अस्पताल में विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि जो लोग पहले से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सांस आदि से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित होते हैं ऐसे लोगों के लिए डेंगू अधिक खतरनाक होता है, लिहाजा इस तरह के रोगों से ग्रस्त मरीजों को डेंगू के प्रति अतिरिक्त सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। इस दौरान माइक्रो बायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डा. विश्वजीत ने लोगों को डेंगू वायरस के प्रकार, डेंगू ग्रसित व्यक्ति के लिए आवश्यक परीक्षण संबंधित वैज्ञानिक व तकनीकि जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को डेंगू के प्रकोप से बचने के लिए समुचित उपाय कर लेने चाहिंए अन्यथा ऐसी महिला के डेंगू से ग्रसित होने की स्थिति में उससे होने वाले बच्चा भी इस संक्रमण से ग्रसित हो सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार बुखार से ग्रसित मरीज को डेंगू बुखार का पता लगाने के पहले पांच दिनों में एनएसआई एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए और यदि बुखार पांच दिन से अधिक बना रहे तो उसे आईजीएम टेस्ट कराना चाहिए,जिससे बुखार के सही प्रकार का पता लगाया जा सकता है। व्याख्यानमाला में एम्स के ब्लड बैंक की ओर से डा. गीता नेगी, डा. दलजीत कौर व डॉक्टर वेदयी ने डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी। इस दौरान डेंगू बुखार को लेकर आयोजित पब्लिक लैक्चर का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण भी किया गया।
संगोष्ठी में संस्थान के उप निदेशक (प्रशासन) अच्युत रंजन मुखर्जी, ट्रामा विभाग के विशेषज्ञ डा. मधुर उनियाल, संस्थान के फैकल्टी सदस्य, एमपीएच छात्र, एम्स सोशल आउटरीच सेल के अमनदीप नेगी, संदीप, स्वाति, त्रिलोक, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति, ऋषिकेश के संरक्षक सतेन्द्र कुमार शर्मा, अध्यक्ष ब्रह्म कुमार शर्मा, अशोक रस्तोगी, रोटरी क्लब ऋषिकेश रॉयल के सदस्य, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय से एसपी यादव ,एएनएम व आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।

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