
जूना अखाड़े की पौराणिक छड़ी यात्रा शुरू, जूना पीठाधीश्वर, मेलाधिकारी, डीएम समेत कई साधु संत मौजूद रहे
हरिद्वार। जूना अखाड़े की पौराणिक छड़ी यात्रा की शुरुआत। हरिद्वार के जूना अखाड़े स्थित मायादेवी मंदिर में विधि विधान के साथ पवित्र छड़ी का पूजन किया गया। कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती भी पूजा अर्चना में शामिल हुए। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी और जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी महाराज समेत कई साधु संतों की उपस्थिति में छड़ी रवाना हुई।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री व जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने बताया कि यह छड़ी यात्रा प्राचीन यात्रा है, जो किन्हीं कारणों से बंद हो गई थी लेकिन भाजपा सरकार के सहयोग से यह यात्रा फिर से प्रारंभ हो गई है। 2017 से यह यात्रा अनवरत चल रही है। माया देवी मंदिर से रवाना होने के बाद उत्तराखंड के सभी मठ मंदिरों में जाएगी। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के साथ ही ओम पर्वत पर भी जाएगी। तमाम मठ मंदिरों के दर्शन के बाद छड़ी यात्रा कुमाऊँ में प्रवेश करेगी।
इसके साथ ही श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने कहा कि कुंभ मेले में स्नान का क्रम ब्रिटिश काल में तय किया गया था, जब 300 साल पहले उन्होंने कुंभ मेले का अधिग्रहण कर लिया था। उन्होंने डिसिप्लिन बनाया था कि अलग अलग कुंभ मेलो में शाही स्नान क्रम के अनुसार ही होगा।
वहीं अखाड़ा परिषद में दो फाड़ एवं एक अखाड़ा परिषद के रेजिस्ट्रेशन के सवाल पर श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने कहा कि कुंभ मेले से पहले कोई भी रेजिस्ट्रेशन करा सकता है। वो चाहते है कि संख्याबल के आधार पर सवा अखाड़ा परिषद का गठन हो। जिस प्रकार से आजादी के बाद राजनीतिक संगठनों की संख्या बढ़ गई थी उसी प्रकार अखाड़ा परिषद भी बढ़ रही हैं।



