उत्तराखंडहरिद्वार

दीक्षा बंधन नहीं, मुक्ति का मार्ग है : करौली शंकर दास जी महाराज

जिस गुरु को स्वीकार करें, उसके प्रति पूर्ण समर्पण रखें : जगतार मुनि

गुरु अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली दिव्य शक्ति हैं : महंत भगत राम जी

करौली धाम में देश-विदेश से आये 11000 श्रद्धालुओं ने ली दीक्षा, हरिद्वार व रायवाला स्थित आश्रमों में कानपुर में हो रहे मुख्य कार्यक्रम से वर्चुअल जुड़ें श्रद्धालुजन

चार दिवसीय गुरू पूर्णिमा महोत्सव में विशेष दीक्षा समारोह में सनातन के वैज्ञानिक स्वरूप के प्रचार और भारत को रोग-मुक्त, शोक-मुक्त बनाने का लिया गया महासंकल्प

हरिद्वार, 31 जुलाई। श्री करौली शंकर महादेव धाम, कानपुर में चार दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर आयोजित 2100 कुंडीय महायज्ञ में श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, हरिद्वार के परम पूज्य मुखिया महंत श्री भगतराम जी, सचिव पूज्य श्री जगतार मुनि जी एवं अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं धाम के संस्थापक श्री करौली शंकर महाराज जी के सानिध्य में लाखों भक्तों ने इस पावन दिव्य आयोजन में भाग लिया। इस अवसर पर दुनिया भर से आए विदेशी अग्रेज शिष्यों ने भी हवन में भाग लिया। साथ ही हरिद्वार व रायवाला स्थित मिश्री मठ में हजारों श्रद्धालु कानपुर में हो रहे मुख्य कार्यक्रम से वर्चुअल जुड़ें। हरिद्वार व रायवाला स्थित मिश्री मठ में कानपुर से ऑनलाइन श्रद्धालुओं व भक्तों को सम्बोधित करते हुए म.मं. करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि दीक्षा बंधन नहीं, मुक्ति का मार्ग है। उन्हांेने कहा कि गुरू पूर्णिमा पावन पर्व हमें गुरू भक्ति के साथ ही कर्तव्य परायणता व सद्मार्ग की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है।

कानपुर स्थित मुख्य पीठ करौली शंकर महादेव धाम में पूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित विशेष दीक्षा कार्यक्रम में करीब 11000 श्रद्धालुओं ने दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की। दीक्षा लेने वाले सभी श्रद्धालुओं ने सनातन धर्म के वैज्ञानिक तथ्यों को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने तथा भारत को रोग-मुक्त और शोक-मुक्त बनाने का संकल्प लिया। गुरू पूर्णिमा महोत्सव में देश-विदेश से श्री राधारमण शिष्य संप्रदाय के हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बाबा-मां के चरणों में अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं, भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और गुरुदेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। हवन व पंचमहाभूत शुद्धि के उपरांत श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज के प्रवचन में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लिया। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि मोक्ष का वास्तविक अर्थ दुख, मोह, प्रश्नों और सांसारिक आसक्ति से मुक्ति है। उन्होंने बताया कि आत्मिक शांति और सही जीवन दृष्टि ही मनुष्य को वास्तविक स्वतंत्रता प्रदान करती है।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव में परम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि करौली शंकर दरबार अपने भक्तों को आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक सुरक्षा प्रदान करता है। दरबार से जुड़ने वाला व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनता है तथा उसके यश और सम्मान में निरंतर वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि दरबार का मार्ग केवल व्यक्ति के वर्तमान जीवन को ही नहीं, बल्कि उसकी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सकारात्मक दिशा और मजबूत संस्कारों की नींव तैयार करता है। अपने संदेश में गुरुदेव ने कहा कि दीक्षा किसी प्रकार का बंधन नहीं, बल्कि सभी बंधनों से मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि करौली शंकर दरबार किसी व्यक्ति को सीमाओं में नहीं बांधता, बल्कि उसे आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और जीवन में सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि गुरु पर पूर्ण विश्वास और अटूट संकल्प ही जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने का सबसे बड़ा साधन है। इसलिए प्रत्येक साधक को अपने सभी दुःख, भय, मोह और लोभ गुरु चरणों में समर्पित कर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ आत्मपूर्णता की इस आध्यात्मिक यात्रा में सम्मिलित होना चाहिए।

इस अवसर पर श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, हरिद्वार के सचिव जगतार मुनि जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिस भी गुरु और दरबार से कोई व्यक्ति जुड़े, उसके मन में यह अटूट विश्वास होना चाहिए कि यही वह द्वार है, जहां से उसके समस्त कष्टों का अंत होगा। उन्होंने कहा कि जब साधक पूर्ण समर्पण के साथ गुरु की शरण स्वीकार करता है, तभी उसे वास्तविक आनंद और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है। सच्चा गुरु वही होता है, जो अपने शिष्य के दुःख, मनोभाव और पीड़ा को बिना कहे ही समझ ले और उसका निवारण कर दे।

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगत राम जी महाराज ने गुरु के वास्तविक स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु के भीतर सौ चंद्रमाओं और हजार सूर्यों के समान दिव्य प्रकाश निहित होता है। गुरु का अर्थ ही अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाला है। उन्होंने कहा कि संतों की संगति, सेवा और उनके बताए मार्ग पर चलने वाला साधक बैकुंठ की प्राप्ति का अधिकारी बनता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर करौली धाम आश्रम साक्षात बैकुंठ का स्वरूप धारण किए हुए है और यहां पहुंचकर प्रत्येक श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर सकता है। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने दीक्षा प्राप्त कर चुके लेवल-1 से लेवल-15 तक के चयनित शिष्यों को ध्यान-साधना के माध्यम से अगले आध्यात्मिक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि साधना का प्रत्येक चरण व्यक्ति के आत्मिक विकास का नया आयाम खोलता है और निरंतर अभ्यास ही आध्यात्मिक उन्नति का आधार है, जो अंततः साधक को ‘रोग मुक्त, शोक मुक्त’ अवस्था तक ले जाता है। हरिद्वार व रायवाला स्थित मिश्री मठ आश्रम में डॉ. उमेश सचान के संयोजन में व कानपुर में अनिरूद्ध शर्मा के संयोजन में श्रद्धालुजनों व साधकों ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

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