
*कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सहित संत-महंतों और महामंडलेश्वरों ने ब्रह्मलीन संतों को अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि
हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री आनन्द आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं पुण्यतिथि समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित किया गया। समारोह में ब्रह्मलीन स्वामी शंकरानन्द जी महाराज, ब्रह्मलीन स्वामी चेतनानन्द जी महाराज एवं ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज को कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सहित संत-महंतों और महामंडलेश्वरों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी संतों एवं श्रद्धालुओं ने संस्था के परमाध्यक्ष पूज्य महंत स्वामी विवेकानन्द महाराज का पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही अपने शिष्यों को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान, संस्कार और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज को धर्म, अध्यात्म, सेवा और सदाचार की दिशा प्रदान करता है। ब्रह्मलीन संतों ने अपने जीवनकाल में धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे समाज सदैव स्मरण करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि श्री आनन्द आश्रम की आध्यात्मिक परंपरा संत समाज और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत है। आश्रम के परमाध्यक्ष पूज्य महंत स्वामी विवेकानन्द महाराज के सानिध्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
आश्रम के परमाध्यक्ष पूज्य महंत स्वामी विवेकानन्द महाराज ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति समर्पण, श्रद्धा और कृतज्ञता का पावन अवसर है। गुरु अपने शिष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और उसे धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी शंकरानन्द जी महाराज, ब्रह्मलीन स्वामी चेतनानन्द जी महाराज एवं ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, साधना और सेवा का प्रतीक रहा है। उनके द्वारा स्थापित आध्यात्मिक परंपराओं और आदर्शों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि संतों का जीवन सदैव लोककल्याण के लिए समर्पित रहा है। सनातन धर्म की महान परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध का विशेष महत्व है और इसी परंपरा ने भारतीय संस्कृति को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से संतों के बताए मार्ग पर चलने और समाज में सेवा, सद्भाव एवं संस्कारों को मजबूत करने का आह्वान किया।
समारोह में उपस्थित संत-महंतों एवं महामंडलेश्वरों ने ब्रह्मलीन संतों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस दौरान आश्रम में भजन, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।इस मौके पर बाबा हठयोगी,महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि,प्रबोधानंद गिरि, पार्षद सूर्यकांत शर्मा,पूर्व पार्षद अनिरुद्ध भाटी,भाजपा नेता राजीव भट्ट,कपिल शर्मा जोनसारी,रितेश शर्मा,रवि प्रभारी,सहित सैकड़ों संतो महंतो ने श्रद्धांजलि अर्पित की।



