उत्तराखंडहरिद्वार

श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर हुआ संत सम्मेलन, विश्व शांति एवं कल्याण हेतु दी गई पूर्णाहुति

 

हरिद्वार।

उत्तरी हरिद्वार स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ का समापन विश्व कल्याण, मानवता की सुख-समृद्धि एवं वैश्विक शांति की कामना के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर संत सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न अखाड़ों एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़े संत-महात्माओं ने धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मुख्य यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने कथा व्यास एवं उपस्थित संत-महात्माओं का विधिवत पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। संत सम्मेलन की अध्यक्षता श्री तुलसी मानस मंदिर के अध्यक्ष एवं कथा व्यास स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने की, जबकि संचालन श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज ने किया।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सदाचार, सेवा, करुणा और भक्ति का संदेश देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा उसे धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर ही समाज में शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है।

महंत ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति का मूल आधार सेवा, समर्पण और संस्कार हैं। श्रीमद्भागवत कथा हमें भगवान के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा प्रदान करता है तथा युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में स्वामी कामेश्वर पुरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का जागरण करना भी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म, प्रकृति संरक्षण एवं गौसेवा के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।

संत सम्मेलन में महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानंद महाराज, श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज, महंत रविदेव शास्त्री, महंत ऋषिश्वरानंद महाराज, महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज तथा महामंडलेश्वर चिदविलाशानंद सरस्वती महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान आर.पी. सिंह, वीना सिंह, करमचंद, तेलूराम अग्रवाल, नितिन एन. शाह, प्रतिमा सिंह, बागेश्वर पाण्डेय एवं पूर्व पार्षद अनिल मिश्रा शिव दास दुबे, राजीव भट्ट, मनोज महंत,ललित कुरेरती,पुनीत बजाज,शंकर उपाध्यक्ष,अतुल पासवान,सुनील सैनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर हवन में आहुतियां अर्पित कीं और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने कथा एवं संत सम्मेलन को अत्यंत प्रेरणादायी एवं आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला आयोजन बताया।

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