अखाड़ा परिषदउत्तराखंडहरिद्वार

श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बड़ा अखाड़ा के पंचों का किया समर्थन



महंत दुर्गादास से मिलकर दिलाया भरोसा, साथ खड़ी है अखाड़ा परिषद*
– अखाड़ा परंपरा में पंच ही मालिक, उनका निर्णय सर्वोपरि: श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज


हरिद्वार: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने बड़ा अखाड़ा उदासीन के पंचों का समर्थन किया है। श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने गुरुवार को बड़ा अखाड़ा पहुंचकर मुखिया महंत दुर्गादास से भेंट की और पंचों का समर्थन करते हुए भरोसा दिलाया कि अखाड़ा परिषद उनके साथ खड़ी है। श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि अखाड़ा परंपरा के अनुसार पंच ही अखाड़े के मालिक होते हैं और उनका निर्णय सर्वोपरि होता है। वहीं, बड़ा अखाड़ा की ओर से महंत मोहनदास के गायब होने की सीबीआई जांच की मांग का भी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी व महामंत्री हरि गिरि ने समर्थन किया। साथ ही संतों की हत्याओं की भी सीबीआई जांच कराने की मांग की।
बड़ा अखाड़ा में पत्रकारों से वार्ता करते हुए श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परंपरा में पंच परमेश्वर होते हैं।

उनके फैसले पर सवाल उठाने का अधिकार किसी को नहीं है। श्रीमहंत ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ साल पहले मैं निरंजनी अखाड़ा का महंत था, तब पंचों ने हमें अखाड़े से बहिष्कार किया था, मे ने कभी पंचों का विरोध नहीं किया और दो साल के भीतर ही पंचों ने अखाड़े में वापस लेकर पद देते हुए अखाड़े का सर्वे सर्वा बनाया। बड़ा अखाड़ा में महंत दुर्गादास सहित जितने भी पदाधिकारी हैं, पंच की ओर से नियुक्त हुए हैं। जिन्हें पंच ने हटाया है, उनका अखाड़ा से कोई लेनादेना नहीं है। श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने साफ किया कि अखाड़े में सचिव सहित जितने भी पदाधिकारी होते हैं, उनकी नियुक्ति पंच करता है, पंच जब भी बोलेगा, पदाधिकारी को पद छोड़ना पड़ेगा। यही हमारी परंपर है। साल 2017 में गायब हुए बड़ा अखाड़ा के महंत मोहनदास के गायब होने की सीबीआई जांच की मांग का भी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी और महामंत्री हरि गिरि ने समर्थन किया। सयुंक्त बयान में कहा कि जिन-जिन अखाड़ों से संत-महंत गायब हुए हैं और संतों की हत्याएं हो चुकी हैं, उनकी भी सीबीआई जांच होनी चाहिए। वहीं, महंत दुर्गादास ने समर्थन और सहयोग का आश्वासन देने पर श्रीमहंत रविंद्र पुरी को धन्यवाद देते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि जिन संतों को अखाड़े से निकाला जा चुका है, उनको यहां रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।



बड़ा अखाड़ा उदासीन अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट के साथ जुड़ा है। पत्रकारों ने जब अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी से इस बारे में सवाल किया तो उनका कहना था कि अखाड़ा परिषद संतों से मिलकर बनती है, जब-जहां संतों को हमारी आवश्यकता होगी, हम उनके साथ खड़े होंगे। सभी अखाड़े आपस में एक हैं, हम जैसे कितनी आए और कितनी चले गए अखाड़ा अमर अजर हैं I बड़ा अखाड़ा उदासीन और निरंजनी अखाड़ा का कोई नया संबंध नहीं हैं। दोनों अखाड़ों में प्राचीन समय से संबंध चले आ रहे हैं। बड़ा अखाड़ा के महंत गोविंद दास पूर्व में अखाड़ा परिषद के मंत्री भी रहे हैं। और हमारे अखाड़ा के महंत शंकर भारती जी अध्यक्ष रहै है I

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