
*ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज का संपूर्ण जीवन गौ सेवा एवं मानव कल्याण को समर्पित रहा: म.म.हरिचेतनानंद महाराज
*प्रथम पुण्यतिथि पर संत-महंतों, महामंडलेश्वरों एवं गणमान्य लोगों ने अर्पित की भावपूर्ण श्रद्धांजलि
हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार स्थित प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री विश्नोई आश्रम के परमाध्यक्ष महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज के सानिध्य में ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भावपूर्ण स्मरण के साथ मनाई गई। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संत-महंतों, महामंडलेश्वरों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों तथा श्रद्धालु भक्तों ने ब्रह्मलीन संत को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके सेवा, त्याग और गौ संरक्षण के कार्यों को स्मरण किया।
श्री विश्नोई आश्रम के परमाध्यक्ष महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज ने गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज का संपूर्ण जीवन गौ सेवा, गंगा संरक्षण, धार्मिक मूल्यों एवं मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि गुरुदेव द्वारा स्थापित सेवा एवं जनकल्याण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाना ही उनके जीवन का उद्देश्य बन गया है। गौ, गंगा, गीता और भगवान जम्भेश्वर की वाणी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज और राष्ट्र स्तर पर निरंतर कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महंत राजेन्द्रानंद महाराज केवल एक संत ही नहीं, बल्कि समाज को सेवा, सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और जीव मात्र के प्रति करुणा का संदेश देने वाले प्रेरणास्रोत थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म और मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।
प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज का संपूर्ण जीवन गौ सेवा एवं मानव कल्याण को समर्पित रहा। सरल, सहज और करुणामयी संत के रूप में उन्होंने जीवनभर सेवा, त्याग और परोपकार को प्राथमिकता दी। उनके विचार और सेवा कार्य सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती एवं महंत स्वामी जयानंद महाराज ने कहा कि महंत राजेन्द्रानंद महाराज ने भगवान जम्भेश्वर की वाणी एवं विश्नोई समाज की पर्यावरण संरक्षण की महान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने जीवनभर गौ एवं गंगा की सेवा करते हुए विश्नोई समाज ही नहीं, बल्कि सर्व समाज को गौ, गंगा, गीता एवं पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जागरूक किया। उनका जीवन धर्म और समाज सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है।
श्रद्धांजलि सभा में संतों ने कहा कि भारतीय संत परंपरा सदैव समाज को सेवा, सद्भाव और संस्कारों का मार्ग दिखाती रही है। महंत राजेन्द्रानंद महाराज ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धर्म के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी। उनके द्वारा किए गए सेवा कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर स्वामी जयानंद, स्वामी गोविंदानंद, आचार्य विश्वात्मानंद, स्वामी गोविंदशरणानंद, स्वामी सागरानंद, पौत्र शिष्य आचार्य अमृतानंद, सर्वानन्द, जगदेवानंद, विश्वंभरानन्द, गजानंद एवं मुक्तेश्वरानंद सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि सभा में पधारे संतों, महामंडलेश्वरों एवं गणमान्य अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज को महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, श्रीमहंत विष्णुदास महाराज, महामंडलेश्वर आत्मप्रकाश यति महाराज, श्रीमहंत दुर्गादास, महंत सूरजदास, महंत रघुवीर दास, बिहारीशरण, मुकमी महंत दिनेश दास, मोहन सिंह, तीर्थ सिंह, महंत डॉ. रविदेव शास्त्री, तुक्षिनमूनी, महंत देवानंद, श्याम प्रकाश, विनोद महाराज, गुरमीत सिंह, जगजीत सिंह, गुरुमाल सिंह, प्रहलाद दास, प्रेमानंद, बाबा बालगिरि, पटवारी, महंत गोपाल गिरि, कोतवाल कमलमुनि, कोतवाल रमेशानंद सरस्वती, महंत ओमप्रकाश शास्त्री, गजेंद्र गिरि, साध्वी रजनी गिरि, मोहन दास, विवेकानंद, रामेश्वरानंद, रविदास, अखिलेश मुनि, जसराम दास, धर्मानंद, राजेश्वरानंद सहित अनेक संतों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस दौरान एडवोकेट दीपक कुमार विश्नोई, शुभम चौधरी, प्रदीप बेनीवाल, संजय बांगड़वा, भानु प्रताप, पवन, प्रमोद गिरि, शिवम गिरि, अश्वनी विश्नोई, विनीत विश्नोई सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी ब्रह्मलीन संत को नमन कर उनकी स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित संतों ने कहा कि महंत राजेन्द्रानंद महाराज का जीवन गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक चेतना और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में सेवा और संस्कार की भावना को मजबूत करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम का वातावरण पूरे समय आध्यात्मिक एवं भावुक रहा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन गौ ऋषि महंत राजेन्द्रानंद महाराज के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।



