
धार्मिक अनुष्ठान से जागृत होती है आध्यात्मिक चेतना, समाज में बढ़ता है सद्भाव और सकारात्मकता: स्वामी ललितानंद गिरि
हरिद्वार। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर मार्ग स्थित पूज्य माता लाल वैष्णों देवी मंदिर में मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई। मंदिर में चल रहे विशेष नवरात्र अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने मां भगवती के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति और समाज की उन्नति के लिए प्रार्थना की।
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं भारत माता मंदिर के महंत स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने कहा कि नवरात्र केवल देवी की पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करने का अवसर भी है। धार्मिक अनुष्ठान मनुष्य के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार करते हैं और उसे सत्य, धर्म, करुणा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जब व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण के साथ मां भगवती की आराधना करता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास, संयम और सेवा भाव का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि मां कूष्मांडा सृष्टि की सृजन शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनकी उपासना से जीवन में उत्साह, साहस और सकारात्मकता प्राप्त होने की मान्यता है। नवरात्र के दौरान की जाने वाली साधना व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने और जीवन की चुनौतियों का धैर्य के साथ सामना करने की प्रेरणा देती है। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि की कामना करना नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और राष्ट्र के कल्याण का संकल्प लेना भी होना चाहिए।
स्वामी ललितानंद गिरि ने कहा कि समाज में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। जब धार्मिक आस्था के साथ सेवा, परोपकार और मानव कल्याण की भावना जुड़ती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे मां भगवती की आराधना के साथ जरूरतमंदों की सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। प्रदेश की उन्नति और जनकल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना तथा सकारात्मक प्रयास ही सुखी और समृद्ध समाज की आधारशिला हैं।
मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास ने कहा कि नवरात्र में मां भगवती के प्रत्येक स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। मंदिर में प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण के लिए विशेष अनुष्ठान किया जा रहा है।



