
नवरात्र के पहले दिन मां भगवती की पूजा-अर्चना से होता है सकारात्मक ऊर्जा का संचार, श्रद्धालुओं से विधि-विधान से पूजन करने की अपील
हरिद्वार। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व है। मां शैलपुत्री शक्ति, आस्था और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि मां भगवती की सच्चे मन से की गई आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और नारी शक्ति के सम्मान का भी प्रतीक है।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि मां दुर्गा की उपासना मनुष्य को धर्म, सेवा, संयम और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। नवरात्र में श्रद्धालुओं को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मां भगवती की पूजा करनी चाहिए। मां शैलपुत्री की कृपा से भक्तों को जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और सद्बुद्धि प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि प्रथम नवरात्र पर प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा और मां शैलपुत्री का ध्यान करें। मां को पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप-दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। मां शैलपुत्री को सफेद पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जाप करने के साथ दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने सभी श्रद्धालुओं को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां भगवती की आराधना से जीवन में सकारात्मक विचारों का विकास होता है और व्यक्ति को समाज सेवा तथा सद्कर्मों की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने मां भगवती मनसा देवी से सभी के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। हर-हर महादेव।



