उत्तराखंडहरिद्वार

भगवान महावीर के जयकारों से गूंजा कनखल, धूमधाम से निकली 33वीं गजरथ यात्रा

स्वर्ण गजरथ पर विराजमान भगवान महावीर की प्रतिमा, जगह-जगह पुष्पवर्षा और जलपान से हुआ स्वागत

हरिद्वार। बैंड-बाजों की गूंज, आकर्षक झांकियों और भगवान महावीर के जयकारों के बीच शुक्रवार को कनखल की सड़कों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर कनखल से 33वीं गजरथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई। स्वर्ण गजरथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान रही। यात्रा के दौरान जैन समाज के श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। कनखल के प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा और जलपान कर स्वागत किया गया।

श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर कनखल में आयोजित 33वें गजरथ यात्रा महोत्सव का आयोजन 105 आर्यिका रत्न विकक्षाश्री माताजी के सानिध्य में हुआ। यात्रा से पहले मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जैन जागृति महिला मंडल की महिलाओं और बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आव्या जैन, अविशी जैन, आराध्या, वैभवी, अविष्का, सार्थक जैन, पलक, पावनी जैन और वागमी जैन ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संचालन रीतू जैन, प्रियंका जैन, शालिनी जैन और पारूल जैन ने किया।

मनुष्य जीवन आत्मकल्याण का सबसे बड़ा अवसर

प्रवचन में 105 आर्यिका रत्न विकक्षाश्री माताजी ने कहा कि चौरासी लाख योनियों में मनुष्य जीवन को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मनुष्य जीवन में ही आत्मशुद्धि कर कर्मों और पापों का क्षय करते हुए मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अपने आचरण और व्यवहार में उतारना ही सच्ची धर्म साधना है।

इसके बाद भगवान महावीर की प्रतिमा को सौधर्म इंद्र स्वर्ण गजरथ पर लेकर यात्रा में शामिल हुए। बैंड-बाजों और झांकियों के साथ गजरथ यात्रा कनखल के प्रमुख मार्गों से निकली। यात्रा के मार्ग में वकीलचंद जैन, आदेश जैन एडवोकेट, संजय जैन, अंकित जैन और वैश्य समाज कनखल सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और जलपान कर स्वागत किया गया।

दस लक्षण धर्म को जीवन में उतारने का आह्वान

गजरथ यात्रा के मुख्य संयोजक संजय जैन और आदेश जैन ने कहा कि जैन समाज ने पर्युषण पर्व के दौरान दस लक्षण धर्म के माध्यम से आत्मशुद्धि का संदेश दिया। उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य मनुष्य को आत्मकल्याण की दिशा में ले जाते हैं। उन्होंने सभी से इन सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

जैन समाज कनखल के अध्यक्ष अंकित जैन, महामंत्री हन्नी जैन और कोषाध्यक्ष रजत जैन ने कहा कि भगवान महावीर का संदेश आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है। अहिंसा, सद्भावना और आपसी प्रेम को अपनाकर ही समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे से छोटे जीव को भी जीने का अधिकार है और सभी प्राणियों के प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए।

मंदिर पहुंचने के बाद धार्मिक विधि-विधान से भगवान महावीर का 108 कलशों से अभिषेक किया गया। इस दौरान वकीलचंद जैन, बालेश जैन, विजय जैन, सतीश जैन, वीरेंद्र जैन, अजय जैन, अरुण जैन, सुभाष जैन, वैभव जैन, संदीप जैन, नीलेश जैन, अर्चना जैन, गरिमा जैन, रेशू जैन, नेहा जैन, शशि जैन, रचना जैन, पूजा जैन, निधि जैन, समर्थ जैन, रुचिन जैन, रवि जैन, मनोज जैन और अनिल जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

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