
सनातन की शक्ति और राष्ट्रसेवा का आधार हैं अखाड़े : श्रीमहंत रविंद्रपुरी
निर्मल संतों की परंपरा भारतीय आध्यात्मिक चेतना की गौरवशाली धरोहर : करौली शंकर महाराज
गुरु गोविंद सिंह की पुण्य स्मृति में निर्मल अखाड़े में वार्षिक श्रद्धा महोत्सव एवं संत समागम, संतों ने कुंभ-2027 को भव्य बनाने का लिया संकल्प
हरिद्वार। श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की पुण्य स्मृति में श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल की निर्मला छावनी में आयोजित वार्षिक श्रद्धा महोत्सव एवं संत समागम में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा को लेकर संतों ने मंथन किया। तेरहों अखाड़ों के संत-महापुरुषों की मौजूदगी में निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि निर्मल संतों का जीवन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ सेवा कार्यों के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह महाराज ने राष्ट्र और धर्म-संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया। उनके आदर्श आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल गुरु नानकदेव जी और गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के आदर्शों पर चलते हुए गुरुवाणी और सनातन धर्म के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।
श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज (महानिर्वाणी) ने कहा कि सनातन को राष्ट्रसेवा का आधार बनाना अखाड़ा परंपरा का प्रमुख दायित्व है। सभी तेरह अखाड़े सनातन की शक्ति के स्रोत हैं और धर्मरक्षक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक एवं श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर बाबा करौली शंकर महाराज ने कहा कि निर्मल संतों की परंपरा भारतीय आध्यात्मिक चेतना की गौरवशाली धरोहर है। उन्होंने कहा कि निर्मल संतों ने केवल धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया है। जब-जब देश और समाज के सामने संकट और चुनौतियां खड़ी हुईं, निर्मल संतों ने समाज की ढाल बनकर उनका सामना किया और धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि संत परंपराओं का संरक्षण और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
महामंडलेश्वर एवं उन्नाव सांसद डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज ने नई पीढ़ी को सनातन धर्म और संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर बाबा शंकर करौली महाराज ने कहा कि निर्मल संतों की परंपरा आध्यात्मिक जगत का गौरव है।
कार्यक्रम में जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, बाबा हठयोगी, महंत भगतराम महाराज, महंत दुर्गादास, स्वामी ऋषिश्वरानंद, नरेंद्र सिंह बिंद्रा, आईडी शास्त्री, संत दर्शन सिंह और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक समेत अनेक संतों ने विचार रखे।
अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, महंत निर्भय सिंह और महंत खेम सिंह ने संतों का स्वागत किया। संचालन महंत जसविंदर सिंह शास्त्री ने किया।अखाड़े के मुखिया महन्त प्यारा सिंह जी, संत जसकरण सिंह, संत तलविन्दर सिंह, महन्त रघुवीर दास, महन्त नितिन दास उदासीन, समाजसेवी अतुल शर्मा, हीरा सिंह बिष्ट, दीपांशु विद्यार्थी, पूर्व मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनोज जखमोला, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष तेलूराम प्रधान, श्री गंगा सभा (रजि०) सचिव उज्जवल पंडित, कार्यक्रम में कुंभ मेला आईजी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी कुंभ, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह सहित संत-महात्मा और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अंत में संतों ने अर्द्धकुंभ-कुंभ 2027 को दिव्य और भव्य बनाने तथा तीर्थनगरी हरिद्वार के संरक्षण का संकल्प दोहराया।



