
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि बड़ा हृदय उसी व्यक्ति का होता है, जो अपने अपमान करने वालों को भी क्षमा कर सके। उन्होंने कहा कि क्षमा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का मूल आधार है तथा प्रतिशोध के बजाय करुणा और क्षमाशीलता अपनाने वाला व्यक्ति ही समाज का वास्तविक पथप्रदर्शक बनता है।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन छात्रों को भी क्षमा कर उदार नेतृत्व का परिचय दिया, जिन्होंने उनके और उनकी माताजी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो व्यक्तिगत कटुता से ऊपर उठकर राष्ट्रहित, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता देता है।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना या अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना नहीं है। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि सनातन धर्म प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और क्षमा का संदेश देता है। हमारे ऋषि-मुनियों और महापुरुषों ने भी समाज को यही शिक्षा दी कि द्वेष और प्रतिशोध समाज को कमजोर करते हैं, जबकि क्षमा और सद्भाव समाज को जोड़ते हैं। यदि इन मूल्यों को व्यवहार में उतारा जाए तो परिवार, समाज और राष्ट्र तीनों अधिक सशक्त बनेंगे।
उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया सहित सार्वजनिक जीवन में संयमित और मर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मतभेद लोकतंत्र की शक्ति हैं, लेकिन उन्हें शालीनता और सम्मान के साथ व्यक्त किया जाना चाहिए। कटु शब्द केवल क्षणिक चर्चा का विषय बनते हैं, जबकि संवाद, मर्यादा और आपसी सम्मान ही मजबूत लोकतंत्र की वास्तविक पहचान हैं।



