उत्तराखंडहरिद्वार

जापान की साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी बनी निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर

पूरी दुनिया के लोग अपना रहे सनातन संस्कृति-श्रीमहंत रविंद्रपुरी

विश्व समुदाय को नई दिशा दे रही भारतीय ऋषि परंपरा-स्वामी बालकानंद गिरी

सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में योगदान करेंगी-महामंडलेश्वर योगमाता सत्यप्रेम गिरी

हरिद्वार, 16 जून। जापान की साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी को निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर की पदवी प्रदान की गयी है। आनंदपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज के सानिध्य में भगवत धाम मंदिर प्रांगण नई दिल्ली में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में संत समाज ने वैदिक विधि-विधान, अखाड़ा परंपरा और संत परंपरांओं के अनुरूप साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी का महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया। संतों ने तिलक चादर प्रदान कर एवं पुष्प वर्षा कर साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी को शुभकामनाएं दी। मुख्य अतिथी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने महामंडलेश्वर साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सनातन धर्म का संदेश मानवता, करुणा और विश्व बंधुत्व है। यही कारण है कि दुनिया के विभिन्न देशों के लोग भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान की साध्वी योगमाता सत्यप्रेम गिरी का महामंडलेश्वर बनना सनातन की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर योगमाता सत्यप्रेम गिरी निरंजनी अखाड़े की परंपरांओं का पालन करते हुए जापान सहित विश्व के अन्य देशों में भी सनातन संस्कृति, योग और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार प्रसार में योेगदान देंगी। आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने कहा कि योग, ध्यान और वैदिक ज्ञान के प्रति विदेशों में अभूतपूर्व रुचि बढ़ी है। भारत की ऋषि परंपरा का ज्ञान अब सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि विश्व समुदाय को नई दिशा दे रहा है। कल्की पीठाधीश्वर स्वामी प्रमोद कृष्णम एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति सदियों से विश्व को दिशा देती रही है। आज जब विदेशों के लोग स्वयं आगे बढ़कर सनातन जीवन-दर्शन को अपना रहे हैं, तो यह भारतीय संस्कृति की सार्वभौमिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम का विचार आज वैश्विक समाज की आवश्यकता बन चुका है। नवनियुक्त महामंडलेश्वर योगमाता सत्यप्रेम गिरी ने कहा कि संत परंपरा और अखाड़ा परंपरा का पालन करते हुए सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार और अखाड़े की प्रगति में योगदान करेंगी। महामंडलेश्वर योगमाता सत्यप्रेम गिरी के गुरु महामंडलेश्वर स्वामी आदित्यानंद गिरि महाराज ने संत समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जापान में जन्मी योगमाता सत्यप्रेम गिरि लंबे समय से भारतीय अध्यात्म, योग और सनातन जीवन मूल्यों से जुड़ी रही हैं। पट्टाभिषेक समारोह में जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि, महामंडलेश्वर स्वामी वेदमूर्ति पुरी, महामंडलेश्वर साध्वी मंजू गिरि, महामंडलेश्वर साध्वी अंजनी देवानंद गिरि, महंत नारायण गिरि, महंत राज गिरि, स्वामी मंगलदास महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रमणि गिरि महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद गिरि महाराज, साध्वी इन्द्राणी नंद गिरि, महंत शिवबन, महंत विश्वास आनंद, अमित वालिया सहित देशभर से आए सैकड़ों संत-महात्मा उपस्थित रहे।

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