
चैत्र नवरात्र पर श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने किया नव देवियों का वर्णन, विधि-विधान से पूजा का महत्व बताया
हरिद्वार। चैत्र नवरात्र पर्व के पावन अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराते हुए नौ देवियों के स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने नवरात्र में किए जाने वाले पूजा-विधि और उसके फल के बारे में भी जानकारी दी।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का विशेष महत्व है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिन चंद्रघंटा, चतुर्थ दिन कूष्मांडा, पंचम दिन स्कंदमाता, षष्ठम दिन कात्यायनी, सप्तम दिन कालरात्रि, अष्टम दिन महागौरी और नवम दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में साधक श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आराधना करते हैं, जिससे उन्हें शक्ति, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और साधना का भी समय है। इस दौरान संयम, सात्विक आहार और सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे विधि-विधान से मां की पूजा करें और अपने जीवन में सदाचार को अपनाएं।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि पूजा के दौरान कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, दीप प्रज्वलन और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। उन्होंने कहा कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई उपासना से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।



