उत्तराखंडहरिद्वार

योग, मंत्र दीक्षा, ध्यान साधना व भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं करौली शंकर महादेव : मुखिया महंत भगतराम जी महाराज 

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण में आयोजित भव्य समारोह में अखाड़ों, संत-महंतों, गणमान्यजनों की उपस्थिति में करौली शंकर महादेव का पट्टाभिषेक समारोह हुआ सम्पन्न

श्री करौली शंकर महादेव धाम, मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव बने श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के महामण्डलेश्वर

हरिद्वार, 31 मार्च। श्री करौली शंकर महादेव धाम, मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव महाराज का पट्टाभिषेक समारोह श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण में आयोजित भव्य समारोह में अखाड़ों के प्रतिनिधियों, संत-महंतों, गणमान्यजनों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के पदाधिकारियों मुख्य रूप से मुखिया महंत भगतराम जी महाराज, मुखिया महंत आकाश मुनि जी, मुखिया महंत मंगलदास जी, अध्यक्ष महंत धूनी दास जी महाराज, सचिव मुखिया महंत जगतार मुनि जी, अध्यक्ष महंत गोपाल दास जी महाराज ने विधि-विधान से करौली शंकर महादेव महाराज का तिलक-चादर व पट्टाभिषेक सम्पन्न करवाया।

पट्टाभिषेक समारोह को सम्बोधित करते हुए मुखिया महंत भगतराम जी महाराज ने कहा कि करौली शंकर महादेव योग, मंत्र दीक्षा, ध्यान साधना व भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं। संतों का जीवन परमार्थ को समर्पित रहता है। करौली शंकर महादेव महाराज देश-दुनिया में मानव मात्र को कष्टों से मुक्ति दिलाने का भागीरथ कार्य कर रहे हैं। मुखिया महंत भगतराम जी महाराज ने कहा कि उन्हें आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि करौली शंकर महादेव श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण की परम्पराओं का पालन करते हुए अखाड़े के मान-मर्यादा व सम्मान में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायंेगे।

सचिव मुखिया महंत जगतार मुनि जी ने कहा कि नया अखाड़ा के महामण्डलेश्वर के रूप में करौली शंकर महादेव भगवान श्री श्री चन्द्र जी के विचारों और परम्पराओं को आत्मसात कर श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि पंडित श्री राधा रमण जी मिश्र के सुयोग्य शिष्य के रूप में करौली शंकर महादेव का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने शिव तंत्र ज्ञान को अंधविश्वास से निकालकर स्मृति आधारित आध्यात्मिक विज्ञान के रूप में स्थापित किया, जिससे मानव जीवन के कष्टों के मूल कारण को समझा जा सके।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज ने करौली शंकर महादेव महाराज को महामण्डलेश्वर पद पर आसीन होने पर मंगल कामनाएं देते हुए कहा कि करौली शंकर महादेव विलक्षण संत हैं, जिन्हांेने सदैव मानवता की सेवा की है। उनके पूज्य गुरूदेव पंडित श्री राधा रमण जी मिश्र को सनातन परंपरा के उन विरले संतों में माना जाता है जिन्होंने तंत्र और आध्यात्मिक साधना को एक नई दिशा दी। उनकी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए करौली शंकर महादेव महामण्डलेश्वर के रूप में भारतीय संस्कृति व सनातन को शिखर पर ले जाने का कार्य करंेगे।

श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा श्री महंत ज्ञानदेव सिंह जी महाराज ने कहा कि करौली शंकर महादेव उच्च कोटि के साधक हैं। नया अखाड़ा ने उन्हें महामण्डलेश्वर बनाकर संत समाज को नयी ऊर्जा व शक्ति प्रदान की है।

कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि करौली शंकर महादेव के पट्टाभिषेक समारोह में उमड़ा संतों व भक्तों का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि करौली शंकर महादेव हम सबकी आस्था के केन्द्र हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आगामी कुम्भ को संतों के आशीर्वाद व सहयोग से भव्यतापूर्वक आयोजित करने हेतु जुटी है।

पट्टाभिषेक समारोह में उपस्थित संत समाज व अखाड़ा परिषद का आभार व्यक्त करते हुए करौली शंकर महादेव ने कहा कि उनके पूज्य गुरूदेव पंडित श्री राधारमण जी मिश्र भी श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन से जुड़े थे जिस कारण उन्होंने महामण्डलेश्वर के रूप में इसी अखाड़े को चुना है। उन्हांेने कहा कि श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण ने महामण्डलेश्वर नियुक्त कर जो सम्मान उन्हें दिया है उसे आजीवन सेवा के माध्यम से समाज को लौटाने का कार्य करंेगे। उन्होंने कहा कि आगामी कुम्भ दिव्य व भव्य रूप से तीर्थनगरी हरिद्वार में आयोजित होगा उसमें अखाड़े की ओर से जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जायेगी उसे पूर्ण निष्ठा से निभाने का निरन्तर प्रयास करंेगे। पट्टाभिषेक समारोह का संचालन महामण्डेलश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज ने किया।

इस अवसर पर श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से कोठारी राघवेंद्र दास, सूर्यांश मुनि जी, कोठारी गोविंद दास जी, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा श्री महंत ज्ञान दास जी, महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद बड़ा उदासीन अखाड़ा, महामंडलेश्वर रूपेन्द्र प्रकाश, महंतश्री बाबा बलराम दास हठयोगी निर्माेही अखाड़ा, महामंडलेश्वर चंद्र मुनि जी, महामंडलेश्वर योगेंद्रानंद, महामंडलेश्वर सुरेश मुनी, मुकामी महंत स्वामी देवानंद जी महाराज, महंत सोहन दास जी, महंत अमर दास जी, महंत सोहन दास दया कला पंजाब, महंत बुध दास, महंत रामशरण दास, मुख्य सेवादार नितिन दास, डॉ. उमेश सचान, अनिरूद्ध शर्मा, शैलेश भाई, बम्मा भाई, राम मुनि जी महाराज, महंत दुर्गादास, रविदेव शास्त्री, महंत दिनेश दास, महंत सुतीक्ष्ण मुनि, महंत दुर्गेशानन्द सरस्वती, म.मं. प्रबोधानन्द जी महाराज, स्वामी जगत स्वरूप दास जी महाराज, डॉ. दयामूर्ति जी महाराज, रामतीर्थ जी महाराज, गुरूमीत सिंह जी महाराज, महंत जीत सिंह, महंत जमुना दास, स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, बलराम मुनि जी महाराज, महंत मोहन सिंह जी महाराज, रामविशाल दास जी महाराज, आचार्य चन्द्रभूषण जी, म.मं. स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, महंत बलवन्त सिंह जी, महंत रघुवीर दास, महंत सूरज दास, महंत दमोदर शरण जी, अपर मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह, अनिरूद्ध भाटी, विनित जौली, अशोक शर्मा, परमिन्दर सिंह गिल, मुकुल पाराशर, गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, विष्णुदत्त राकेश समेत देशभर से आये संतजन, भक्तजन उपस्थित रहे।

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