उत्तराखंडहरिद्वार

पर्यावरण संरक्षण हेतु सतत विकास के अतिरिक्त कोई और मार्ग नही: श्री महंत डॉ रविन्द्र पुरी  

हिमालय प्रकृति की आत्मा है उसका संरक्षण जरूरी: पदमश्री कल्याण सिंह रावत

जल संरक्षण अब विकल्प नहीं संकल्प है: प्रो बत्रा

17 मार्च 2026

हरिद्वार।

एस० एम० जे० एन० पी० जी० कॉलेज में आन्तरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ , पर्यावरण प्रकोष्ठ , स्टैंडर्ड क्लब एवं उत्तराखण्ड स्टेट काउसिंल ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलोजी (यूकॉस्ट) के संयुक्त तत्वाधान में जल संरक्षण और गंगा नदी के पुनर्जीवन विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं महाविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० सुनील कुमार बत्रा ने सभी गणमान्य अथितियों का स्वागत किया एवं अपने विचार प्रस्तुत करते हुये कहा कि बढ़ती हुई जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने जल संरक्षण को और अधिक आवश्यक बना दिया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण अब विकल्प नहीं संकल्प है। प्रो बत्रा ने ‘बूंद बूंद में प्राण बसें है, व्यर्थ न इनको बहने दो ‘ कविता के माध्यम से जान जागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रो बी०डी० जोशी ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि नदियों की पवित्रता , ज्ञान , एवं सांस्कृतिक विकास से सीधा सम्बन्ध स्थापित करती है । उन्होंने कहा कि जब तक प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं करेंगे तब तक जल संरक्षण संभव नहीं होगा । प्रो जोशी ने कहा कि हमारी सरकारें इस विषय पर बहुत ध्यान दे रही है और संरक्षण के लिए ठोस क़दम उठा रही है। इस अवसर पर सुलभ सोशियोलॉजी ऑफ़ सैनिटेशन की ओर से विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ० नील रतन ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुये कहा कि भारतीय समाज वर्ण व्यवस्था में बटाँ हुआ है सुलभ शोचालयों की विकास प्रक्रिया ने समाज के वर्गभेद मिटाने की प्रक्रिया में क्रान्ति का कार्य किया है । प्रधानमंत्री के संकल्प ‘ देवालय से पहले शौचालय ‘ का महत्व समझाया । इस राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में मैती आन्दोलन के अग्रदूत पदमश्री श्री कल्याण सिंह रावत उपस्थित रहे। पदमश्री रावत ने अपने ज्ञानवर्धक विचारों को साझा करते हुये बताया कि सर्वप्रथम महाकवि कालिदास ने ‘कुमार संभव ‘ में लिखा है कि हिमालय प्रकृति की आत्मा है जो जल को संरक्षित कर हमें जीवन प्रदान करती है। पृथ्वी पर सबसे बड़ा संकट जल का है। पृथ्वी के आन्तरिक सतह पर स्थिति 60 प्रतिशत जल हम खाली कर चुके है। पर्यावरण असन्तुलन का दुष्परिणाम है कि प्रतिवर्ष 26 जीव-जन्तु प्रजातियाँ हिमालय से लुप्त होती जा रही है। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प ही इसका एकमात्र विकल्प है। उन्होंने महाविद्यालय को बधाई देते हुए कहा कि आज हम सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष , माँ मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष पूजनीय श्री महत डॉ० रविन्द्र पुरी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तराखंड औषधियों का भण्डार है । श्रीमहंत ने धार्मिक आख्यानों के माध्यम से जल के महत्व को समझाते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण हेतु सतत विकास के अतिरिक्त कोई और मार्ग नहीं हैं। श्री महन्त ने नमामि गंगे द्वारा चलाये जा रहे अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि हम सभी को भी राष्ट्रिय नदी माँ गंगा के संरक्षण हेतु निरंतर जनजागरण करना होगा। इस अवसर पर शिक्षा तथा शोध में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ के डॉ मोहित कुमार, चमनलाल महाविद्यालय, लंढौरा की डॉ रिचा चौहान, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ उमाकांत, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के डॉ विवेक शर्मा को अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस दिया गया। डी ए वी पी जी कॉलेज देहरादून के डॉ पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा को कीट विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु एंटोमोलॉजिस्ट ऑफ़ द ईयर 2025 अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ संजय माहेश्वरी को शिक्षा और समसामायिक विषयों पर निरंतर कार्य करने के लिए अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्रीमहंत डॉ रविन्द्रपुरी तथा मैती प्रणेता पदमश्री कल्याण सिंह रावत के करकमलो द्वारा पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी दिया गया। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में विभिन्न संस्थानों से आये प्रतिभागियों द्वारा विषय से सम्बंधित शोध पत्र भी पढ़े गए। कार्यक्रम के समापन सत्र में महाविद्यालय की डॉ पूर्णिमा सुन्दरियाल, डॉ सरोज शर्मा को सर्वश्रेष्ठ व्याख्यान हेतु पुरस्कृत किया गया। शोध विद्यार्थियों की श्रेणी में दिव्या नेगी को सर्वश्रेष्ठ व्याख्यान हेतु पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजक सचिव डॉ विजय शर्मा ने महाविद्यालय प्रशासन, यूकॉस्ट, सभी अतिथियों, सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

lakshyaharidwar

Lakshya Haridwar Pallavi Genral Store, Gali No -3 Birla Farm, haripur klan, Dehradun 9411111512

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button