उत्तराखंडहरिद्वार

पैसों से सुख नहीं खरीदा जा सकता : आर्यिका पूर्णमति

 

हरिद्वार, हरिद्वार के प्रेम नगर आश्रम सभागार में परम् पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता के सानिध्य में चल रहे 1008 भक्तामर महामण्डल बीजाक्षर विधान, विश्व शांति महायज्ञ का सातवां दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। बुधवार सुबह 1008 भगवान आदिनाथ जी का अभिषेक एवं नित्य नियम पूजा संपन्न कराई गई। विधान में उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व शांति की कामना करते हुए विश्व में चल रहे युद्धों के शीघ्र शांतिपूर्ण समाप्त होने की भगवान से प्रार्थना की। कार्यक्रम में रजत जैन ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैन जागृति महिला मण्डल पंचपुरी, हरिद्वार की सदस्य अंजली जैन, पूजा जैन, प्रियंका जैन, कु. आव्या, प्रियल जैन, नीति जैन, अंशिका जैन आदि ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए। वहीं नीतू जैन के संयोजन में मोना जैन, विनती, गीतिका, नमिता, कोमल, निधि, पीहू, ऋषभ जैन, शौर्य, लक्ष्य राघव, अमिता, सार्थक, रूबी, सविता, कल्पना व मोना आदि ने भक्तामर स्तोत्र के रचयिता आचार्य मंतुगं स्वामी के जीवन पर आधारित आकर्षक नाटिका प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।

इस अवसर पर पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य अपने जीवन में आए दुखों को किसी अन्य को नहीं दे सकता और न ही पैसों से सुख खरीद सकता है। जीवन में दुख आता है तो सुख भी अवश्य आता है। जिस प्रकार रात्रि के बाद सवेरा होता है, उसी प्रकार सुख और दुख जीवन के चक्र हैं। इस अवसर पर पीयूष जैन, समर्थ जैन, मीडिया प्रभारी सतीश जैन, आदेश जैन, रजत जैन, संदीप जैन, नितेश जैन, रवि जैन, रूचिन जैन सहित अर्चना जैन, रीतू जैन, पारुल जैन आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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