
हरिद्वार। श्री प्रेमनगर आश्रम में निर्मित भव्य पाण्डाल में आयोजित 1008 भक्तामर महामण्डल बीजाक्षर विधान (विश्व शांति महायज्ञ) का आज तीसरा दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन पूज्य सन्त शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी महाराज की शिष्या पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी के सानिध्य में चल रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन धार्मिक अनुष्ठानों से हुई, जिसमें 1008 भगवान आदिनाथ जी का अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजा विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराई गई। इसके बाद विधान में इन्द्र-इन्द्राणियों द्वारा हजारों अर्घ अर्पित किए गए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर अपने प्रवचन में पूज्य आर्यिका 105 पूर्णमति माता जी ने कहा कि समय और समझ का मिलन अत्यंत दुर्लभ होता है। अक्सर जब समय होता है तब समझ नहीं होती और जब समझ आती है तब तक समय निकल चुका होता है। उन्होंने कहा कि जो भक्त सही समय पर समझदारी के साथ भगवान की भक्ति कर लेता है, उसका समय कभी खराब नहीं होता। उन्होंने सभी से अपने मस्तिष्क को उच्च विचारों के लिए, हाथों को दान के लिए और हृदय को सद्भावना के लिए पवित्र रखने का संदेश दिया।
विधान के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। हास्य कवि सुनहरी लाल ‘तुरंत’ और सोनल जैन ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को खूब हँसाया। वहीं वीर रस के कवि रामावतार नागर और कमलेश जैन ‘बसंत’ ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं में जोश और उत्साह का संचार किया।
इस अवसर पर संदीप जैन, जे.सी. जैन, मीडिया प्रभारी सतीश जैन, आदेश जैन, बालेश जैन, पीयूष जैन, समर्थ जैन, रवि जैन, श्रीमती अर्चना जैन, रीना जैन, श्रीमती रीतू जैन, पूजा जैन, प्रियंका जैन, मोना जैन, रचना जैन, अंकित जैन, हन्नी जैन, रूचिन जैन, अमित जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।



