

स्वामी अर्जुन पुरी महाराज की कीर्ति विश्वविख्यात है – स्वामी अवधेशानंद गिरी
तेरह अखाड़ों के साधु संतों की उपस्थिति में स्वामी कामेश्वरानंद पुरी का पट्टाभिषेक
हरिद्वार, महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज बालयोगी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात हरिद्वार के सप्तसरोवर मार्ग स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर में श्रद्धांजलि सभा एवं षोडशी भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में संत-महात्मा, अखाड़ों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि सभा में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहंत विशोकानंद महाराज, जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरी महाराज सहित अनेक वरिष्ठ संतों ने सहभागिता की। इस दौरान मंच पर तेरह अखाड़ों के संतों की उपस्थिति में स्वामी कामेश्वरानंद पुरी महाराज का विधिवत पट्टाभिषेक किया गया। परंपरानुसार चादर विधि संपन्न कराई गई। कार्यक्रम का संचालन जूना अखाड़े के पूर्व अंतर्राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज ने किया। सभा में उपस्थित संतों ने ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुन पुरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शिष्य स्वामी कामेश्वरानंद पुरी महाराज को गुरु परंपरा का उत्तराधिकार संभालने पर आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर नगर विधायक मदन कौशिक, मेयर किरण जैसल समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि स्वामी अर्जुन पुरी महाराज की कीर्ति विश्वविख्यात है। उनका जीवन तप, स्वाध्याय और सेवा को समर्पित रहा। हिमाचल, हरियाणा और हरिद्वार में उन्होंने दशकों तक धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का मार्गदर्शन किया। प्रसन्नता है कि उन्होंने अपने योग्य शिष्य के रूप में स्वामी कामेश्वरानंद पुरी महाराज को संत समाज को सौंपा है।
महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर श्रीमहंत विशोकानंद महाराज महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन अर्जुन पुरी महाराज द्वारा तुलसी मानस मंदिर की स्थापना एक ऐतिहासिक और स्मरणीय कार्य है। सनातन धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा।
जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरी महाराज ने कहा कि स्वामी अर्जुन पुरी महाराज ने आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार को पहला तुलसी मानस मंदिर प्रदान किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक मानस की कथा को घर-घर पहुंचाने का कार्य किया। जब तक गंगा में जल रहेगा, तब तक उनका नाम स्मरण में रहेगा। नगर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि वर्ष 2002 से लेकर आज तक प्रत्येक चुनाव में उन्हें स्वामी अर्जुन पुरी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। महाराज श्री संत समाज और सनातन धर्म के साथ साथ क्षेत्र के विकास के लिए भी सदैव चिंतित रहते थे। वहीं स्वामी कामेश्वरानंद पुरी ने कहा कि अपने गुरु के द्वारा प्रशस्त किए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे और संत तथा सनातन के प्रचार प्रसार के लिए कार्य करेंगे।
कार्यक्रम में निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री, जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी महाराज, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज, महेश पुरी महाराज, महामंडलेश्वर रामेश्वरानंद गिरी, महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी, मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती, साध्वी श्रद्धा गिरी, साध्वी चेतना गिरी, श्रीमहंत रामचरण दास महाराज, महंत ऋषिश्वरानंद, महंत लक्ष्मी नारायण, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, बागेश्वर पांडे, विनोद मिश्रा, सूर्यकांत शर्मा, आकाश भाटी, अनिरुद्ध भाटी, विदित शर्मा, राजीव भट्ट और अनिल मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साधु संत मौजूद रहे।



