
हरिद्वार, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रकरण पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी ने मेला प्रशासन के अधिकारियों को गलत ठहराया है। हरिद्वार में महंत रविंद्र पुरी ने बयान दिया कि मेले में व्यवस्था का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकारियों ने ब्रह्मचारियों और संतों को पीटा और उनकी शिखा पड़कर खींचा गया। ये दृश्य विचलित करने वाला है। शिखा सनातन का प्रतीक है इसलिए शिखा पड़कर खींचना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भी अपील की है कि उन्हें भी अब ज़िद छोड़ देनी चाहिए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गलत बयान बाजी नहीं करनी चाहिए। श्रीमहंत डॉ रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि प्रयागराज में प्रशासन की गलती थी लेकिन स्नान के भी नियम कानून को भी सब मानते हैं। परंतु सबसे दुखद घटना ये है कि प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मौजूद साधु संतों और वेदपाठी ब्राह्मणों को पीटा गया। हमने इस मारपीट का विरोध किया है। साथ ही मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने संतों को नंगा करके पीटा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस दुखद घटना को बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है। ब्राह्मणों की शिखा सनातनियों का प्रतीक है, शिखा खींखकर यदि मारा पीटा जाएगा, ये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को भी हठधर्म नहीं करना चाहिए और अपनी जिद भी छोड़ देनी चाहिए। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। जब से प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरने पर बैठे हैं, तब से तमाम संगठन उनके समर्थन में उतर आए हैं। साधु संत भी दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। कई बड़े संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बयान दिया तो कई उनके समर्थन में भी बोलते नजर आ रहे हैं। अपनी मांग पर अड़े शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना जारी है। हरिद्वार में तो कई संगठनों ने उनके समर्थन में विरोध मार्च निकाला और धरना दिया। यहां तक कि कुछ नेताओं ने तो अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया। इन सबके बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्रपुरी का बयान भी सामने आया है।



