

छठे नवरात्र पर माता लाल वैष्णो देवी गुफा वाला मंदिर में विशेष अनुष्ठान, महामंडलेश्वर ने पूजन कर उतारी आरती
मंदिर संचालक भक्त दुर्गादास ने फूल-मालाओं से किया स्वागत, स्वर्गीय हीराबेन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
हरिद्वार। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उत्तरी हरिद्वार स्थित पूज्य माता लाल वैष्णो देवी गुफा वाला मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। नवरात्र के छठे दिन मंदिर में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना कर देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना की गई। इस अवसर पर श्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक एवं महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर ने मां भगवती का विधिवत पूजन किया और आरती उतारकर विश्व कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने मां भगवती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शक्ति की उपासना मनुष्य के भीतर साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार करती है। नवरात्र केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और जीवन में सद्गुणों को अपनाने का अवसर भी है।
इस अवसर पर मंदिर में कन्याओं का पूजन भी किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर ने कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया और सम्मानपूर्वक आशीर्वाद लिया। कन्याओं को भोजन कराकर उपहार भेंट किए गए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन नारी शक्ति के सम्मान, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। नवरात्र में कन्याओं की पूजा हमें बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देती है।
गुरुवार को माता लाल वैष्णो देवी गुफा वाला मंदिर पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर का मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास ने फूल-मालाओं से स्वागत और अभिनंदन किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और श्रद्धापूर्वक आरती में भाग लिया। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। मां भगवती के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भी मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर ने मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माता स्वर्गीय हीराबेन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नमन किया। उन्होंने श्रद्धा भाव के साथ दिवंगत हीराबेन को स्मरण किया। मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करने का यह प्रसंग भी उपस्थित लोगों के लिए विशेष रहा।
मां भगवती की उपासना देती है आत्मबल
महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर ने मां भगवती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है। मां भगवती शक्ति, साहस, करुणा और कल्याण की प्रतीक हैं। उनकी उपासना मनुष्य को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना व्यक्ति के मन को एकाग्र करती है तथा उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र का प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की आराधना को समर्पित है। यह पर्व हमें नारी शक्ति के सम्मान, धर्म के मार्ग पर चलने और बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा देता है। मां भगवती की आराधना का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार में भी पवित्रता लाना है। जब व्यक्ति अपने जीवन में संयम, सेवा, करुणा और सदाचार को अपनाता है, तभी आध्यात्मिक साधना सार्थक होती है।
धार्मिक अनुष्ठानों से मजबूत होती है सांस्कृतिक परंपरा
स्वामी करौली शंकर ने कहा कि नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिकता से जोड़ने के साथ समाज में आपसी सद्भाव, सहयोग और सकारात्मकता की भावना को भी मजबूत करते हैं। मंदिरों में होने वाले पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने मां भगवती से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की कामना की। साथ ही कहा कि धार्मिक आस्था के साथ मानवीय मूल्यों को अपनाना भी आवश्यक है। सेवा, सद्भाव और परोपकार की भावना से किया गया कार्य समाज के कल्याण का माध्यम बनता है। नवरात्र का पर्व हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश देता है।
मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास ने श्रद्धालुओं से नवरात्र के दौरान मां भगवती की आराधना के साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मंदिर में आयोजित विशेष पूजा-अर्चना का उद्देश्य भी जनकल्याण और सभी के जीवन में सुख-शांति की कामना करना है।

