उत्तराखंड

देश के 77वें गणतंत्र दिवस पर स्वामी रामदेव ने दिलाए पञ्चप्रण

 

• स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति तथा स्वदेशी से स्वावलम्बी विकसित भारत की बात कही

• भारत को विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक, सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति बनाने की आवश्यकता, पूरी दुनिया भारत से ले प्रेरणा

• साधु-संतों और शंकराचार्य में कोई झगड़ा न हो, देश में वर्ण-जाति-समुदाय-प्रांत व भाषा के नाम पर कोई उन्माद न हो

• भारत मजबूत होगा तो पूरी दुनिया में हिंदुओं पर कोई अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं कर पाएगा

• एक देश, एक संविधान, एक झंडा, एक संकल्प, एक भारत, श्रेष्ठ भारत होगा, तभी तो स्वस्थ, समृद्ध, संगठित, विकसित भारत बनेगा

• हर व्यक्ति प्रतिदिन गोधन आधारित कम से कम 10 रुपए का प्रोडक्ट प्रयोग करेगा, तभी गौ-माता व नंदी सुरक्षित होंगे

राष्ट्रीय/ हरिद्वार 26 जनवरी, 2026 : पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष स्वामी रामदेव जी व महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जी ने पतंजलि वेलनेस, फेस-2 में ध्वजारोहण कर देशवासियों को देश के 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर स्वामी जी ने स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति तथा स्वदेशी से स्वावलम्बी विकसित भारत- पञ्चप्रण लेते हुए राष्ट्रसेवा की बात कही।

स्वामी जी ने कहा कि कहीं टैरिफ टैरेरिज़म चल रहा है, कहीं सत्ता का उन्माद, कहीं सम्पति का उन्माद और कहीं मज़हबी उन्माद, और भारत में तो सनातनधर्मियों में ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके सनातन में भी गौमाता, गंगा व पालकी के नाम पर उन्माद फैलाने की बात की जा रही है। अमेरिका ने कनाडा को 100% टेरिफ की धमकी दी तो कभी भारत पर 25-50%, कभी किसी देश पर तो 500% टैरिफ की धमकी, दुनिया एक बहुत खतरनाक दौर से गुजर रही है। ऐसे में हमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत, स्वस्थ, समृद्ध, संगठित भारत बनाना है तो स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति और अपनी सनातनी विरासत को सर्वोपरि गौरव और महिमा देते हुए आज गणतंत्र दिवस पर अपने कर्तव्य पथ पर प्रतिबद्धता के साथ इस रूप के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है कि हम भारत को दुनिया के सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति सबसे बड़ी सैन्य शक्ति सबसे बड़ी राजनीतिक सामाजिक और आध्यात्मिक शक्ति के रूप में विकसित कर पाएं और पूरी दुनिया भारत से प्रेरणा ले पाए। उन्होंने स्वदेशी से स्वावलम्बी विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की बात कही।

उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि सब स्वदेशी का व्रत लें और मैकाले की शिक्षा का बहिष्कार करें, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि सारी बुराइयों का और सब प्रकार के आपसी लड़ाई-झगड़ों का बहिष्कार करके हमें भारत की एकता, अखण्डता और संप्रभुता को सर्वोपरि रख करके डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि मैं वह दिन देखना चाहता हूं कि हमारा 1 रुपया 100 डॉलर के बराबर हो और वह तभी सम्भव है जब हम 140 करोड़ भारतीय अखंड-प्रचंड पुरुषार्थ के साथ प्रयास करें। हम सभी चाहते हैं कि हमारी वैल्यू हो, हमारे पासपोर्ट की वैल्यू हो हमारे सिटीजन की वैल्यू हो लेकिन अभी स्थिति यह है कि दुनिया के 10-15 देश को छोड़कर के दुनिया का कोई बड़ा देश हमको हमारे पासपोर्ट पर बिना वीजा के अपने यहां आने तक की अनुमति नहीं देता है। हमें अपने हालात बहुत निम्नतम स्तर पर ले आए हैं। हम आज यदि हमने अपने देश को शक्तिशाली नहीं बनाया तो अमेरिका, चीन से लेकर के हमारा मित्र देश रशिया भी हमसे मुंह फेर लेंगे।

स्वामी जी ने कहा कि आज पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुनिया के बहुत सारे देशों में बहुत विरोधी ताकतें सिर उठा रही हैं। हमें इस गणतंत्र दिवस पर स्वधर्म का संकल्प लेना है तो जो पूरे भारत को अपने दुश्मन देशों, भारत विरोधी, सनातन विरोधी ताकतों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए एक परिवार की तरह एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि साधु-संतों और शंकराचार्य में कोई झगड़ा न हो, न ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र के नाम पर काई उन्माद हो, न कोई जाति वर्ग के समुदाय के नाम पर उन्माद हो, न प्रांत के नाम पर किसी प्रकार का कोई प्रांतवाद का उन्माद हो, न भाषावाद का उन्माद हो, न कोई सांप्रदायिक विवाद हो। हम सब एक ऋषियों की, एक पूर्वजों की, एक वीर-वीरांगनाओं की संतान हैं, एक धरती माता, भारत माता की संतान हैं, इस संकल्प के साथ हम आगे बढ़ेंगे तो भारत पूरी दुनिया का मुकाबला कर पाएगा और हर मोर्चे पर दुनिया में जीत पाएगा।

योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने कहा कि भारत मजबूत होगा तो पूरी दुनिया में हिंदुओं पर कोई अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं कर पाएगा। आज इजराइल मजबूत है तो पूरी दुनिया में यहूदियों पर कोई टेढ़ी नजर नहीं कर सकता। बुरी नज़र से नहीं देख सकता, क्योंकि उसके पीछे बहुत बड़ी बैक है। यदि हम अपने देश को मजबूत नहीं बनायेंगे तो कहीं न कहीं से संकट हम पर मंडराते ही रहेंगे और हिंदू जहां रहेंगे, पिटते ही रहेंगे। इसलिए यदि हिंदुस्तान से पूरी दुनिया में हिंदू, हिंदुत्व और सनातन को सुरक्षित करना है, तो वीर भोग्या वसुंधरा बनना ही पड़ेगा।

यूसीसी के एक वर्ष पूर्ण होने पर स्वामी जी ने कहा कि एक देश, एक संविधान, एक झंडा, एक संकल्प, एक भारत, श्रेष्ठ भारत हो, तभी तो स्वस्थ, समृद्ध, संगठित, विकसित भारत बनेगा। इसीलिए सारे देश में तक विस्तार होना ही चाहिए, चाहे वह कानून के स्तर पर हो या विचार के स्तर पर।

स्वामी रामदेव जी ने कहा कि गौ-माता राष्ट्र माता नहीं बल्कि विश्व माता घोषित होनी चाहिए, लेकिन वह होगी कैसे? माना कि कानून भी बन गया, गौ-माता राष्ट्र माता घोषित हो गई, लेकिन गौ माता और नंदी कैसे बचेंगे? गौ-आधारित कृषि, भारत ऋषि और कृषि प्रधान देश कैसे होगा? जब तक सुबह उठकर के जब तक हम गोधन अर्क का सेवन नहीं करेंगे, गौ-घृत का सेवन नहीं करेंगे, घरों में स्वच्छता के लिए गोनाइल का प्रयोग नहीं करेंगे, जब तक गौ-आधारित कृषि नहीं होगी, जब तक गोचर भूमि सुरक्षित नहीं होगी, अपराधियों के कब्जे से गोचर भूमि नहीं छूटेगी, तब तक गौ-माता सुरक्षित कैसे हो सकती है? जब हर व्यक्ति कम से कम 10 रुपए का भी प्रोडक्ट रोज प्रयोग करना शुरू कर दे तो हर दिन कम से कम 10,00 से 10,000 करोड़ रुपए हिंदू गौ माता के लिए सहयोग कर पाएंगे, तभी गौ माता बचेगी। इसके साथ-साथ हर एक हिंदू एक-एक गाय पाले। पतंजलि एक लाख गौ माता की सेवा कर रहा है, ऐसे ही एक-एक धर्माचार्य और जितने भी हमारे साधु संत महात्मा हैं, कम से कम 1 हजार से लेकर, 10 हजार व 1 लाख गाये स्वयं पालें और हिंदुओं से पलवाने के लिए हर एक दिन बाहर निकलें। हमें अपने मठ-मंदिरों से बाहर निकलना होगा, सुबह तीन-चार बजे से रात के 10 बजे तक पुरुषार्थ करना पड़ेगा, खाली बयानबाजी से बात नहीं बनेगी। हमारी संस्कृति तो पुरुषार्थ चतुष्टय के धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की सिद्धि व पुरुषार्थ से समृद्ध होगी, खाली लफ्फाजी से नहीं होगी।

कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमको बहुत कुछ सिखाता है। जीवन में जब-जब कमजोरियाँ आएं तो उन वीर, शहीद, क्रान्तिकारियों, महापुरुषाें को याद करना जिनकी बदौलत आज हम देश का यह 77वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे उद्देश्यों के लिए जीना मनुष्य जीवन का लक्ष्य नहीं, मनुष्य जीवन का मकसद नहीं, बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उन वीर-शहीदों के बताए मार्ग पर चलकर देश में नया सवेरा लाने का संकल्प करें, जिससे यह देश विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठापित हो सके।

lakshyaharidwar

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